यादें
सर्दियों की रात थी और मैं सोने से पहले यों ही टहलने बाहर आया और गाँव की तरफ देखने लगा कुछ क्षण बाद जैसे ही आकाश की और देखा ,देखता ही रह गया....आँखों से आंसू निकल आये,गला भर सा गया.....सर्दी मनो बढ़ सी गयी हो ,गर्दन दर्द से जकड गयी और गला सुख गया मानो बरसो से पानी न पिया हो पर फिर भी न जाने क्यों मन मैं अलग सी तृप्ति थी, देखने मैं तो आसमान और कुछ तारे ही थे पर न जाने कितनी यादें याद दिला गए !!!

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