बस एक बारिश का ख्वाब

चलते चलते भीग गए हम
प्रस्वेद गिरा धरती पे आन
सुखी मिट्टी सोंधी खुशबू
और अट्टाहस करती चाह...
मिल जाए एक घटा अनोखी
बस एक....बारिश का ख्वाब ।।

(चित्र साभार : सुश्री लियक्ष्मा देवड़ा )

कंकड़ पत्थर थोरी कांटे
मिट्टी उड़ती, बन धूल गुब्बारे
राह खड़े पतझड़ के पौधे
सूखे ताल नदी और नाले
सोचे चातक पथरीली आंखे
मिल जाए एक घटा अनोखी
बस एक... बारिश का ख्वाब ।।
 
चले पवन पुरवाई बनके
ले आए बदरी की गठड़ी
मौर करे उनका अभिनंदन
कंठ लगे चकवे की जान
मिल जाए एक घटा अनोखी
बस एक...बारिश का ख्वाब ।।

 पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़
@ मंडी अहमदगढ़ जुलाई 2023

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